वाल्मीकि रामायण एक मंदिर है और रामचरितमानस में डुबकी लगा मंदिर में प्रवेश किया जाता है- डॉ. राजेश श्रीवास्तव
जिसमें संस्कारों की हजारों नदियाँ प्रवाहित होती हैं -सुभाष अत्रे
भोपाल। नरेश मेहता कक्ष हिंदी भवन में राष्ट्रीय रामायण केंद्र की टी.टी. नगर महिला इकाई का परिचायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें राष्ट्रीय रामायण केंद्र के डॉ राजेश श्रीवास्तव, सचिव रुपाली सक्सेना एवं अरुण गुप्ता जी केंद्रीय इकाई से उपस्थित थे। रामायण केंद्र की महिला इकाई टी.टी नगर की अध्यक्ष सुधा दुबे, संयोजक मृदुल त्यागी एवं मंत्री मंजूलता श्रोति को बनाया गया।सुभाष अत्रे ने रामायण के अध्ययन अध्यापन और प्रचार प्रसार तथा जन सामान्य में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए रामायण केन्द्र इकाई स्थापित करने पर सभी को बधाई दी। नीलू हर्षे , प्रतिभा श्रीवास्तव एवं उषा चतुर्वेदी श्यामा गुप्ता दर्शना ने राम भजन सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में राष्ट्रीय रामायण केंद्र के निदेशक राजेश श्रीवास्तव ने सभी सदस्यों को बधाई देते हुए इस इकाई के संचालन और कार्य के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए सभी इकाइयों की एक बैठक आयोजित करने के लिए घोषणा की उन्होंने बाल्मीकि रामायण और तुलसी रामचरितमानस के संबंध में अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि बाल्मीकि रामायण एक मंदिर है और रामचरितमानस नदी है।जिसको समझकर मंदिर में प्रवेश किया जा सकता है। सभी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह आने वाली पीढ़ी को रामचरितमानस से जोड़ने के लिए नवाचार करने के लिए संकल्पित हैं।
इस कार्यक्रम में सरोज गुप्ता, तिलोत्तमा सारस्वत, प्रियंका श्रीवास्तव, चंद्रा सक्सेना श्यामा गुप्ता दर्शना, मंजुला ठाकुर, नीलू हर्षे और अन्य सदस्य उपस्थित थे।










