महाराणा प्रताप जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में महाराणा प्रताप जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने अपने संबोधन में बताया कि महाराणा प्रताप स्वतंत्रता, स्वाभिमान व पौरुष के प्रतीक हैं। उन्होंने अपने शासन में अनेकों प्रशासनिक सुधार किए और सभी समुदायों को समावेशी जानकर अपनी सेना व प्रशासन में स्थान दिया था। प्रो. लाभ ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप के युद्ध कौशल का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप ने शासन के विकेंद्रीकरण पर कार्य किया था।

प्रो. लाभ ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय के काव्य में महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी की लड़ाई का सजीव चित्रण मिलता है, जिसमें अपने ऊंचे-तगड़े घोड़े चेतक को नकली सूंड लगाकर महाराणा ने हाथी जैसा दिखाकर युद्ध की रणनीति बनाई थी। महाराणा प्रताप अपने पिता उदय सिंह की ही तरह छापामार युद्ध में पारंगत थे। उनके शौर्य और बल का ज़िक्र करते हुए प्रो. लाभ ने बताया कि हल्दीघाटी की लड़ाई में अकबर ने सुलह के लिए तीन बार अपने सेनापतियों को भेजा था लेकिन महाराणा प्रताप ने उनके सामने समर्पण नहीं किया। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप की सेना के सामने हज़ारों की संख्या में मुगल सैनिक एक ही दिन में मारे गए। कुलगुरु ने नवीन शोध के आधार पर जानकारी दी कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप हारे नहीं थे, बल्कि अकबर को पीछे हटना पड़ा था।

कुलगुरु प्रो. लाभ ने बताया कि भारतीय शौर्य की प्रतिमूर्ति महाराणा प्रताप ने कई मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया  जिसमें एकलिंग जी व श्रीनाथजी के मंदिरों का पुनरुद्धार भी शामिल है। महाराणा प्रताप ने भाषा एवं साहित्य के संरक्षण के उद्देश्य से मेवाड़ी भाषा को अपने दरबार की राजकीय भाषा भी बनाया था। अपने शासन के दौरान उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के कई प्रयास किए थे। उनके इस कार्य के सम्यक अध्ययन की आवश्यकता भी कुलगुरु ने रेखाकिंत की।

सांची विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष व्याख्यान का आयोजन वैकल्पिक शिक्षा विभाग की ओर से किया गया था। मंच का संचालन विभागाध्यक्ष व सहायक प्राध्यापक डॉ प्रभाकर पाण्डेय ने किया। डॉ पाण्डेय ने बताया कि संपूर्ण भारत कभी परतंत्र नहीं रहा। परिचर्चा में विभिन्न गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने भी महाराणा प्रताप के शौर्य , साहस एवं स्वाभिमान पर प्रकाश डाला।

Related Posts

प्रेरणास्त्रोत रामेश्वर नामदेव बने राजगढ़ जिले के नामदेव समाज अध्यक्ष, इंजी. अरुण नामदेव ने किया सम्मानपूर्वक नियुक्त

भोपाल। राजगढ़ जिले के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले, प्रेरणास्रोत श्री रामेश्वर नामदेव को नामदेव समाज

Read More

इंजी. अरुण नामदेव के नेतृत्व में संत शिरोमणि नामदेव महाराज की नगरी पंढरपुर के लिए निकली ऐतिहासिक नामदेव यात्रा

भोपाल। नामदेव समाज के श्रद्धा, आस्था और संगठन की अद्भुत मिसाल बनने जा रही *नामदेव धर्म यात्रा, जो संत शिरोमणि

Read More

म.प्र. की यह पहल भाषाई इतिहास में सदैव उल्लेखनीय रहेगी- प्रो कविता रस्तोगी ,लखनऊ वि.वि

घुमन्तू समुदायों की सबसे बड़ी पहचान उनकी विशिष्ट भाषा है- डॉ. धर्मेन्द्र पारे ,निदेशक, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, भोपाल  अकादमी

Read More

प्रेरणास्त्रोत रामेश्वर नामदेव बने राजगढ़ जिले के नामदेव समाज अध्यक्ष, इंजी. अरुण नामदेव ने किया सम्मानपूर्वक नियुक्त

भोपाल। राजगढ़ जिले के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले, प्रेरणास्रोत श्री रामेश्वर नामदेव को नामदेव समाज विकास परिषद मध्य प्रदेश का

Read More »

इंजी. अरुण नामदेव के नेतृत्व में संत शिरोमणि नामदेव महाराज की नगरी पंढरपुर के लिए निकली ऐतिहासिक नामदेव यात्रा

भोपाल। नामदेव समाज के श्रद्धा, आस्था और संगठन की अद्भुत मिसाल बनने जा रही *नामदेव धर्म यात्रा, जो संत शिरोमणि नामदेव महाराज के जन्मस्थल पंढरपुर

Read More »

भोपाल में तीन दिवसीय ‘महिला उद्यमिता को समर्पित’ राखी स्पेशल एडिशन एग्जीबिशन शुरु

भोपाल। आज का दौरा महिला को पुरी तरह समर्पित हो गया है। जहां महिलाएं घर की देखभाल करने में पीछे नहीं रहती है तो वहीं

Read More »

म.प्र. की यह पहल भाषाई इतिहास में सदैव उल्लेखनीय रहेगी- प्रो कविता रस्तोगी ,लखनऊ वि.वि

घुमन्तू समुदायों की सबसे बड़ी पहचान उनकी विशिष्ट भाषा है- डॉ. धर्मेन्द्र पारे ,निदेशक, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, भोपाल  अकादमी द्वारा उन उपेक्षित भाषाओं को

Read More »

विक्रमोत्सव 2025 को मिला एशिया का वाउ गोल्ड अवार्ड

4 जुलाई 2025, भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव 2025 को वाउ अवार्ड एशिया 2025 (WOW Awards Asia 2025) द्वारा

Read More »